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सपना देखलाई ऊ रोज 'रामराज' के!

sapna dekhlai uu roj ramraj ke!

अशोक द्विवेदी

अशोक द्विवेदी

सपना देखलाई ऊ रोज 'रामराज' के!

अशोक द्विवेदी

और अधिकअशोक द्विवेदी

    जनता के बा चिन्ता

    'हया अउर लाज' के!

    कुलि से का मतलब

    नेतन का आज के?

    हिन्दू-मुस्लिम बीचे खाई खोनवा देई

    मारकाट करवा के सबके बिलगा देई

    सपना देखलाई रोज 'रामराज' के!

    नेत-बरक्कत सगरो दांव पर लगा देई

    चीन्हि चीन्हि अपनन के रेवड़ी बंटवा देई

    गद्दी खातिर बाँटी सौ दफा समाज के!

    आँवाँ में भूख गरीबी के जरि जाई—

    छछनत दुइ रोटी के लोग इहाँ मरि जाई

    ठकचल गोदाम रही देश में अनाज के!

    सत्यवान कमे-उमिर रोज इहाँ मरि जालन

    फेंकरत सावित्री के देखि 'जम' उखड़ जालन

    कवन भरोसा केहू करी धरमराज के?

    नेता-अफसर-नोकर आइ-आइ खाँच गइल

    सइंचल सपना गाँधीजी के ना साँच भइल

    झलक कबो ना लउकल देश में 'सुराज' के।

    राजनीति घर-दुआर गाँव-शहर चरि जाई

    समझे में हमहन के जिन्दगी गुजरि जाई

    कई परत बोकला बा जइसे पियाज के।

    स्रोत :
    • पुस्तक : फूटल किरिन हजार (पृष्ठ 63)
    • रचनाकार : अशोक द्विवेदी
    • प्रकाशन : पाती प्रकाशन, बलिया
    • संस्करण : 2003

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