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समय कइसन आ गइल

samay kaisan aa gail

रमाकान्त मुकुल

रमाकान्त मुकुल

समय कइसन आ गइल

रमाकान्त मुकुल

और अधिकरमाकान्त मुकुल

    नाश के बदरी गगन में छा गइल

    समय कइसन गइल

    घुट रहल अब आदमी के साँस बा

    साँच पर ना हो रहल विश्वास बा

    भार धरती के सभे बाटे बनल

    झूट के परचम इहाँ लहरा गइल

    हो रहल बा जीत इहँवा पाप के

    ठग रहल बा लोग अपना आप के

    ओठ पर अमृत, जहर मन में भरल

    रीत जग के लाज लख शरमा गइल

    दिन भइल दुश्मन कि काटत रात बा

    बात में हर घात प्रतिघात बा

    हो गइल बीमार जब रितुराज तक

    काग ना, कोयल कुबोल सुना गइल

    स्रोत :
    • पुस्तक : आँचर के टुकड़ा (पृष्ठ 32)
    • रचनाकार : रमाकान्त मुकुल
    • प्रकाशन : भोजपुरी संस्थान, पटना
    • संस्करण : 2003

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