सखि हो, प्रेम नगरिया हमरो छूटल जात बा
sakhi ho, prem nagariya hamro chhutal jaat ba
महेन्द्र मिसिर
Mahendra Misir
सखि हो, प्रेम नगरिया हमरो छूटल जात बा
sakhi ho, prem nagariya hamro chhutal jaat ba
Mahendra Misir
महेन्द्र मिसिर
और अधिकमहेन्द्र मिसिर
(निर्गुण)
सखि हो, प्रेम नगरिया हमरो छूटल जात बा,
जियरा मोर डेरात बा ना।
घर में बाप मतारी-भाई
सँग में केहू नाहीं जाई
सखि हे, झूटे नाता जग में इहाँ बुझात बा,
जियरा मोर डेरात बा ना।
बाबूजी गइलन बाजार
रुपिया लेके दुई-चार
सखि हो, हमरा लागी चुनरी खरीदात बा,
जियरा मोर डेरात बा ना।
काँचे बँसवा कटाई
नया डोलिया बनाई
सखि हो, रहिए-रहिए डोलिया लचकत जात बा,
जियरा मोर डेरात बा ना।
लगले चार गो कँहार
लेके चलले साजन-द्वार
सखि हो, हमके छोड़िके सभे फिरल जात बा,
जियरा मोर डेरात बा ना।
छूटल घरवा-दुआर
छूटल जग-परिवार
सखि हो, नेकी-बदी सँगवा ससुरा जात बा,
जियरा मोर डेरात बा ना।
भजन द्विज महेन्द्र गावे
लेखा जग के इहे बतावे
सखि हो, हरि के भजऽ, समइया बीतल जात बा,
जियरा मोर डेरात बा ना।
- पुस्तक : महेन्द्र मिसिर के चुनिंदा भोजपुरी गीत (पृष्ठ 32)
- संपादक : भगवती प्रसाद द्विवेदी
- रचनाकार : महेन्द्र मिसिर
- प्रकाशन : सर्व भाषा ट्रस्ट, नई दिल्ली
- संस्करण : 2021
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