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राष्ट्र गीत

raashtr geet

मूंगालाल शास्त्री

मूंगालाल शास्त्री

राष्ट्र गीत

मूंगालाल शास्त्री

और अधिकमूंगालाल शास्त्री

    जिन्दाबाद! जिन्दाबाद!! हिन्दुस्तान जिन्दाबाद!!!

    हिमालय सरताज में चमके धवल धरोहर पुरखन के

    चरण धोए सागर तरंग नित गिनगिन बली के गरदन के

    गिनते-गिनते शान्त सागर बलिदानी के तादाद।

    जिन्दाबाद...

    सदियन से बहत आइल बा अँवर-बँवर के ईहाँ बयार

    दीप अखण्ड बड़त बा ईहवाँ बिना कइले कुछुओ के आर

    कइसे दीया बुताई जब तेल-बात्ती में फौलाद॥

    जिन्दाबाद...

    किसिम-किसिम के फूल फुलाइल एके गो फूलवारी में

    देश प्रेम पराग से बढ़ फूल भरले बा अंकवारी में

    इतर बनल पितरन के गाथा ऊहे ईहाँ बुनियाद॥

    जिन्दाबाद...

    चहक रहल सोन चिड़इया पनकल पाँख अब फेरू

    नील गगन में भरी उड़ान संगे ले पंख पखेरू

    तूड़ी पिंजड़ा जाल जराई जग के करी आजाद॥

    जिन्दाबाद...

    रतन भरल धरती के तर में ऊपर हीरा-मोती उपजे

    नदी पहाड़ जंगल मंगल ईहँवे से रितुराज सजे

    नगर नगीना तीरथ तउलल जग में एकरे बाद॥

    जिन्दाबाद...

    युद्ध का ज्वाला से निकलल शान्ति ईहाँ विरासत में

    हाथ बढ़ा जग चाहो से ले लेवो दुनू स्वागत भारत में

    सहम जाले बाघिन बच्चा ला देख एकर औलाद।

    जिन्दाबाद! जिन्दाबाद!! हिन्दुस्तान जिन्दाबाद!!!

    स्रोत :
    • पुस्तक : भिनुसार हो गइल (पृष्ठ 31)
    • रचनाकार : मूंगालाल शास्त्री
    • प्रकाशन : भोजपुरी भारती, सारण
    • संस्करण : 2016

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