हमके चुनरी बसन्ती मँगवा दऽ
hamke chunari basanti mangva daऽ
रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’
Rambahadur ‘Adhir Pindvi’
हमके चुनरी बसन्ती मँगवा दऽ
hamke chunari basanti mangva daऽ
Rambahadur ‘Adhir Pindvi’
रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’
और अधिकरामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’
हमके चुनरी बसन्ती मँगवा दऽ सजना।
मनवा भावेला रंगवा दूसर कवनो ना॥
एक ही बसन्ती रंग मन मोरी भावे।
दूसर रंग कवनो समझ नाही आवे॥
ओइपर जय हिन्द तू लिखवा दऽ सजना॥
हमके चुनरी बसन्ती...
नोकरी करेलऽ पिया तू त पलटनिया।
घूमि-घूमि देखेलऽ तू सब दुनिया॥
हमके करगिल तू अबकी देखादऽ सजना॥
हमके चुनरी बसन्ती...
एटम बम के कमी इहवां ना बाटे।
अबकी लगाइ देइबि दुसमन के घाटे॥
हमरो हथवा बन्दुखिया थम्हादऽ सजना॥
हमके चुनरी बसन्ती...
बड़ी मनमोल बाँटे देशवा के माटी।
कन्या कुमारी होखे चाहे होखे घाटी॥
साफ दुस्मनवाँ के बतादऽ सजना॥
हमके चुनरी बसन्ती...
- पुस्तक : गँउवा के माटी अनमोल (पृष्ठ 51)
- रचनाकार : रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’
- प्रकाशन : अखिल भारतीय भोजपुरी समाज, गोमतीनगर, लखनऊ
- संस्करण : 2010
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