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मुस्कुरा कर मुझे मत निहारा करो

muskura kar mujhe mat nihaara

विशाल समर्पित

विशाल समर्पित

मुस्कुरा कर मुझे मत निहारा करो

विशाल समर्पित

और अधिकविशाल समर्पित

    मुस्कुरा कर मुझे मत निहारा करो

    गीत कैसा पढ़ूँ कुछ इशारा करो

    यामिनी का अभी तो प्रथम दौर है

    चाँद तारे गगन मे आए हुए

    फूल हँसते रहे आज जो डाल पर

    देखता हूँ सभी सिर झुकाए हुए

    रातरानी कभी भी खिले मत खिले

    भाव सुंदर कभी भी मिले मत मिले

    मन मिलन का तुम्हारा करे जब शुभे

    कंगनो की खनक से पुकारा करो

    गीत कैसा पढ़ूँ कुछ इशारा करो

    मुस्कुरा कर मुझे मत निहारा करो

    वेदना की कहानी लिखी हो जहाँ

    ज़िंदगी भर वही पृष्ठ मोड़े रहें

    दुःख तुम्हारे कभी पास आए नहीं

    सुख सदा द्वार पर हाथ जोड़े रहें

    नेह झरना बनूँ मैं निरंतर झरूँ

    इस धरा के सभी सुख समर्पित करूँ

    स्वप्न तक में कभी रूठना मत प्रिये

    रूठकर तुम स्वयं को हारा करो

    गीत कैसा पढ़ूँ कुछ इशारा करो

    मुस्कुरा कर मुझे मत निहारा करो

    मुस्कुरा कर झुका लो नयन बाबरे

    गीत का हार स्वर्णिम पिन्हा दूँ तुम्हे

    ज़िंदगी भर अगर साथ तुम दे सको

    हमसफ़र आयुभर का बना लूँ तुम्हें

    दिव्य-सी लग रहीं हैं कुँवारी लटें

    मुग्ध करतीं मुझे ये तुम्हारी लटें

    नेह के पाश में बाँधती हैं प्रिये

    स्याह बिखरी लटें मत सँवारा करो

    गीत कैसा पढ़ूँ कुछ इशारा करो

    मुस्कुरा कर मुझे मत निहारा करो

    स्रोत :
    • रचनाकार : विशाल समर्पित
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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