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मेरे घर के ठीक सामने

mere ghar ke theek samne

मनोज जैन

मनोज जैन

मेरे घर के ठीक सामने

मनोज जैन

और अधिकमनोज जैन

    मेरे घर के ठीक सामने,

    एक बगीचा है।

    कभी आम की शाख लचक

    कर पास बुलाती है।

    चंपा की हर फूली डाली,

    मन बहलाती है।

    गदराई लीची ने अपना,

    नेह उलीचा है।

    अल्हड़ हरसिंगार झूमकर,

    गीत सुनाता है।

    अपनी लाली से गुलमोहर

    मन मदमाता है।

    नर्म दूब का दूर-दूर तक,

    बिछा गलीचा है।

    नीम गाछ छह खड़े पंक्ति में,

    नेह लुटाते हैं।

    पीपल जामुन हँस दें तो,

    बादल घिर आते हैं।

    वल्लरियों ने फूल-पात से,

    रचा दरीचा है।

    तन-मन हर्षित देख-देख हर्षाता,

    मोद उमड़ता है।

    रोज सबेरे सूरज किरणें

    आकर धरता।

    ख़ुशियों ने हर्षा-हर्षाकर

    तन-मन सींचा है।

    साँझ ढले पंछी आएँगे,

    मंगल छाएगा।

    उत्सवधर्मी मन सपनों में,

    फिर खो जाएगा।

    बरबस आठों याम ध्यान को,

    इसने खींचा है।

    स्रोत :
    • रचनाकार : मनोज जैन
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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