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मन फोड़ा अस फूट गइल

man phoDa as phoot gail

रमाकान्त मुकुल

रमाकान्त मुकुल

मन फोड़ा अस फूट गइल

रमाकान्त मुकुल

और अधिकरमाकान्त मुकुल

    घइला फूटल

    मन फोड़ा अस फूट गइल

    झरल आँख से जीवन-मोती

    ले सन्ताप घुटन के

    खारा जल में तैरे लागल

    टुटही नाव सपन के

    अच्छा-बुरा समय

    पीछे छूट गइल

    सूख गइल धरती पर चू के

    पर, ना प्यास बुताइल

    मिल के बिछुड़ गइल सागर से

    घटा रूप धर आइल

    सूखल ओठ कण्ठ में

    विष के घूँट गइल

    स्रोत :
    • पुस्तक : आँचर के टुकड़ा (पृष्ठ 1)
    • रचनाकार : रमाकान्त मुकुल
    • प्रकाशन : भोजपुरी संस्थान, पटना
    • संस्करण : 2003

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