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मैं लगा दूँ जो मेहंदी तेरे हाथ में

main laga doon jo mehandi tere haath mein

रत्नेश अवस्थी

रत्नेश अवस्थी

मैं लगा दूँ जो मेहंदी तेरे हाथ में

रत्नेश अवस्थी

और अधिकरत्नेश अवस्थी

    मैं लगा दूँ जो मेहंदी तेरे हाथ में,

    नाम तेरा भी बदनाम हो जाएगा,

    है यहाँ पर चलन एक बाज़ार-सा,

    रोज़ बिकते हैं सच झूठ को बोलकर,

    छल सदा ही बिका भावना के बदल,

    पर मिला प्रेम हमको सदा तौलकर,

    करने सौदा चला गर जो बाज़ार में,

    प्यार का सौ गुना दाम हो जाएगा,

    एक पीड़ा लिए हम इधर से उधर,

    जंगलों में फिरे एक मारीच बन,

    मन सदा स्वर्ग की आस करता रहा,

    तन हमेशा रहा पाप का बीज बन,

    यूँ अगर राम आते रहे तीर लें,

    मृत्यु का भी बड़ा नाम हो जाएगा,

    नेह की करवटों की सभी सलवटें,

    एक पावन कहानी सुनाती रहीं,

    गई चंदनी-सी महक तन में जब,

    प्यार की हर कली मुस्कुराने लगी,

    नेह का अर्थ यदि जो हुआ वासना,

    प्यार का नाम भी काम हो जाएगा,

    स्रोत :
    • रचनाकार : रत्नेश अवस्थी
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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