जगमग दीप बरय आँगनमे
jagmag deep baray anganame
जगमग दीप बरय आँगनमे!
हटय दूर अज्ञान,
ज्ञान निर्झरणी झहरय
प्रतिभा-लता
मनुजताकेर आलयपर लतरय
काव्य-कल्पना-दीप
प्रदीप्त करय मानव-मन
स्नेहक स्रोत जगय,
अगजगमे समता पसरय
दीपक थार सजय आंगनमे।
संकल्पक वर्त्तिका जरय,
भागय निष्क्रियता
ज्योति-पर्व नूतन स्वरमे
संगीत सुनाबय
अवनीसँ अम्बर धरि
गूँजय नव स्वर-लहरी
मंगल-गान धराक
उर्वशी-रम्भा गाबय
सौरभ-श्री छलकय आँगनमे
- पुस्तक : हम भेटब (मैथिली गीत-नवगीत संग्रह) (पृष्ठ 92)
- रचनाकार : मार्कण्डेय प्रवासी
- प्रकाशन : जखन-तखन, दरभंगा
- संस्करण : 2004
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