खेलत में रहलीं हम सुपुली-मउनिया
khelat mein rahlin hum supuli mauniya
(निर्गुण)
खेलत में रहलीं हम सुपुली-मउनिया
ए ननदिया मोरी रे,
आइ गइले डोलिया-कँहार, ए ननदिया मोरी रे!
बाबा मोरा रहिते रामा, भइया मोरा रहिते
ए ननदिया मोरी रे,
फेरि दिहिते डोलिया कँहार, ए ननदिया मोरी रे!
काँच-काँच बाँसवा के डोलिया बनवले
ए ननदिया मोरी रे,
लागि गइले चारि गो कँहार, ए ननदिया मोरी रे!
नाहीं मोरा लूर-ढंग, एको ना रहनवाँ
ए ननदिया मोरी रे,
लेइ के चलले ससुरार, ए ननदिया मोरी रे!
कहत महेन्दर, मोरा लागे नाहीं मनवाँ
ए ननदिया मोरी रे,
छूटि गइले बाबा के दुआर, ए ननदिया मोरी रे!
- पुस्तक : महेन्द्र मिसिर के चुनिंदा भोजपुरी गीत (पृष्ठ 46)
- संपादक : भगवती प्रसाद द्विवेदी
- रचनाकार : महेन्द्र मिसिर
- प्रकाशन : सर्व भाषा ट्रस्ट, नई दिल्ली
- संस्करण : 2021
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