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खेलत में रहलीं हम सुपुली-मउनिया

khelat mein rahlin hum supuli mauniya

महेन्द्र मिसिर

महेन्द्र मिसिर

खेलत में रहलीं हम सुपुली-मउनिया

महेन्द्र मिसिर

और अधिकमहेन्द्र मिसिर

    (निर्गुण)

    खेलत में रहलीं हम सुपुली-मउनिया

    ननदिया मोरी रे,

    आइ गइले डोलिया-कँहार, ननदिया मोरी रे!

    बाबा मोरा रहिते रामा, भइया मोरा रहिते

    ननदिया मोरी रे,

    फेरि दिहिते डोलिया कँहार, ननदिया मोरी रे!

    काँच-काँच बाँसवा के डोलिया बनवले

    ननदिया मोरी रे,

    लागि गइले चारि गो कँहार, ननदिया मोरी रे!

    नाहीं मोरा लूर-ढंग, एको ना रहनवाँ

    ननदिया मोरी रे,

    लेइ के चलले ससुरार, ननदिया मोरी रे!

    कहत महेन्दर, मोरा लागे नाहीं मनवाँ

    ननदिया मोरी रे,

    छूटि गइले बाबा के दुआर, ननदिया मोरी रे!

    स्रोत :
    • पुस्तक : महेन्द्र मिसिर के चुनिंदा भोजपुरी गीत (पृष्ठ 46)
    • संपादक : भगवती प्रसाद द्विवेदी
    • रचनाकार : महेन्द्र मिसिर
    • प्रकाशन : सर्व भाषा ट्रस्ट, नई दिल्ली
    • संस्करण : 2021

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