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केहू गोदवाई हो गोदनवाँ?

kehu godvai ho godanvan?

महेन्द्र मिसिर

महेन्द्र मिसिर

केहू गोदवाई हो गोदनवाँ?

महेन्द्र मिसिर

और अधिकमहेन्द्र मिसिर

    बनके गोदनहारी कान्हा चलले जहवाँ रहली राधा

    गउआँ में घूमि कहे नन्द के ललनवाँ

    केहू गोदवाई हो गोदनवाँ?

    राधा जी सुनत बोली, आपन केंवाड़ी खोली

    आवऽ गोदनहारी आवऽ हमरी अँगनवाँ

    हम गोदवाइब हो गोदनवाँ।

    कान्हा जब धइले हाथ, रधिका ठोकेली माथ

    नारी नाहीं हउवऽ तू हउवऽ मरदानवाँ

    कइसे गोदवाईं हो गोदनवाँ?

    भेद जब जनली सखिया, कहेले कन्हइया रसिया

    तोहरे कारन भइलीं मरद से जनानवाँ

    तनी गोदवावऽ हो गोदनवाँ!

    कहत महेन्द्र गाइ, रधिका मने मुसुकाइ

    राधा अउर कान्हाजी के भइले मिलनवाँ

    केहू गोदवाई हो गोदनवाँ?

    स्रोत :
    • पुस्तक : महेन्द्र मिसिर के चुनिंदा भोजपुरी गीत (पृष्ठ 51)
    • संपादक : भगवती प्रसाद द्विवेदी
    • रचनाकार : महेन्द्र मिसिर
    • प्रकाशन : सर्व भाषा ट्रस्ट, नई दिल्ली
    • संस्करण : 2021

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