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कवनो अइसन दिया बनी

kavno aisan diya bani

रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

कवनो अइसन दिया बनी

रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

और अधिकरामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

    कवनो अइसन दिया बनि सकीं तऽ बनीं।

    सनेह के रोशनी हम बनिके जलीं॥

    उम्र होखे भले कुछु पल कुछु घड़ी,

    बस अंधेरा मिटे मोम सा हम गलीं।

    प्रीति के रीति सबके सिखावल करीं।

    मंदिरों में जरीं मस्जिदो में बरीं॥

    भाई चारा बनीं आपसी मेल हो,

    छलि जाई भले ना केहू के छलीं॥...

    केहू भूलल हो ओकर सहारा बनीं।

    नाव डूबत हो ओकर किनारा बनीं॥

    जग के उजियार हम करि सकीं त करीं,

    हम भले रोशनी के बिना ही पलीं॥...

    हऽ दिया नाम हमरो दिया ही करीं।

    कवनो थाती ना अपनी लिये हम धरीं।

    दे सकीं प्राण भी देश हित के लिए,

    हम सदा धर्म की राह पर ही चलीं॥...

    स्रोत :
    • पुस्तक : गँउवा के माटी अनमोल (पृष्ठ 33)
    • रचनाकार : रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’
    • प्रकाशन : अखिल भारतीय भोजपुरी समाज, गोमतीनगर, लखनऊ
    • संस्करण : 2010

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