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कटहर के लासा

kathar ke lasa

भोलानाथ गहमरी

भोलानाथ गहमरी

कटहर के लासा

भोलानाथ गहमरी

और अधिकभोलानाथ गहमरी

    प्रीति में ना धोखा देईं, प्यार में ना झाँसा,

    प्यार करीं अइसन जइसे, कटहर के लासा।

    प्रीति में…

    ना हउवे आगि जवन धधके बीनु धूआँ,

    ना हउवे ताल-तलइया ना हउवे कूआँ,

    प्यार हउवे मछरी जवन, पानी में पियासा।

    प्रीति में…

    होख-ऽ भइया लैला-मजनू, होख-ऽ हीर-रांझा,

    होख-ऽ तूँ पतंग जइसे डोरी संग मांझा,

    प्यार हउवे दुनियाँ जवन देखले तमासा।

    प्रीति में…

    जाति के ना पाति के ना धरम के दोहाई,

    बोले के ना चाले के ना रूप सुघराई,

    प्यार हउवे जवना के की, कवनों नाहीं भासा।

    प्रीति में…

    रतिया के दीन करे सुनू मोरे मीता,

    अपना के मीठ लागे दुनियाँ के तीता,

    प्यार बजावे जवन, कपरे पर तासा।

    प्रीति में…

    स्रोत :
    • पुस्तक : लोक रागिनी (पृष्ठ 89)
    • रचनाकार : भोलानाथ गहमरी
    • प्रकाशन : रागिनी प्रकाशन, गाजीपुर
    • संस्करण : 1995

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