Font by Mehr Nastaliq Web

जीवन एक नदी था तट था बहती नावें थीं

jivan ek nadi tha tat tha bahti naven theen

ओम निश्चल

ओम निश्चल

जीवन एक नदी था तट था बहती नावें थीं

ओम निश्चल

और अधिकओम निश्चल

    कुछ शब्दों से दुख झरता है

    कुछ शब्दों से सुख

    कुछ शब्दों की ख़ामोशी ही

    कह देती सब कुछ।

    कभी-कभी सोचा करता हूँ

    कैसी नियति मिली

    तुम थे हम थे पर क़िस्मत थी

    कितनी करमजली

    बीच राह में

    छूट गए हाथों से सारे सुख।

    आईने निर्मम होते हैं

    सच कह देते हैं

    चेहरे के ऊपर की

    रंगत ज्यों धो देते हैं

    लेकिन धधक बची रहती है

    जैसे चिता अबुझ।

    जीवन एक नदी था

    तट था, बहती नावें थीं

    सब कुछ कलरव में डूबा था

    किन्तु कराहें थीं

    डूब रहा था साँसों का

    सूरज जैसे सचमुच।

    स्रोत :
    • रचनाकार : ओम निश्चल
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY