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जनि जा बिदेस

jani ja bides

भोलानाथ गहमरी

भोलानाथ गहमरी

जनि जा बिदेस

भोलानाथ गहमरी

और अधिकभोलानाथ गहमरी

    सँवरिया जनि जा बिदेसवा की ओर।

    होइ जइहें सूना मोरा घरवा-अँगनवाँ,

    तोहरे दरस बिनु कलपी परनवाँ,

    सिसिकत होइहनि भोर। सँवरिया…

    दुइ-चार दिनवाँ बतिया जो रहिती,

    त, कवनों जतनियाँ से जियरा मनइतीं,

    बरिसन होला नाहीं थोर। सँवरिया…

    जब-जब आई तिहुआरे दिनवाँ,

    खनकि उठी हो मोरा हाथे कँगनवाँ,

    करिहें बिरह बरजोर। सँवरिया…

    धूमिल होइहनि माथे सेनुरवा,

    सुखि-पुखि जड़हनि परलो कजरवा,

    लटि जइहें केसिया छोर। सँवरिया…

    तोहरे रहत पिया सब केहू आवे,

    हित-मित नित मीठी बोलिया सुनावे,

    जाते होइहें कठोर। सँवरिया…

    स्रोत :
    • पुस्तक : बयार पुरवइया (पृष्ठ 95)
    • रचनाकार : भोलानाथ गहमरी
    • प्रकाशन : भारतीय प्रकाशन, इलाहाबाद
    • संस्करण : 1964

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