जागि गइल देस के किसनवाँ, बिहनवाँ में देर नइखे भइया
jagi gail des ke kisanvan, bihanvan mein der naikhe bhaiya
विजेन्द्र अनिल
Vijendra Anil
जागि गइल देस के किसनवाँ, बिहनवाँ में देर नइखे भइया
jagi gail des ke kisanvan, bihanvan mein der naikhe bhaiya
Vijendra Anil
विजेन्द्र अनिल
और अधिकविजेन्द्र अनिल
जागि गइल देस के किसनवाँ, बिहनवाँ में देर नइखे भइया,
रखिया के ढेर से उड़ल चिनगारी
सागर के पेटवा में दहकल अंगारी
धधकल गाँव के सिवनवाँ, बिहनवाँ में देर नइखे भइया,
बूढ-ढूढ़ फेंड़वन में लाल-लाल टूसवा,
सहमल अमेरिका, सहमि गइल रूसवा,
लाल हो रहल असमनवाँ, बिहनवाँ में देर नइखे भइया,
ललकी किरिनियाँ से दरकल अन्हरिया,
गंउआ के ओर ताके दिलिया सहरिया,
चिहकल रानी के कंगनवा, बिहनवाँ में देर नइखे भइया,
वूटवा बरदिया के गुजरल जबनवाँ
हँसुआ के धार भइली गाँव के जननवाँ,
जुलुमिन के नाक में परनवाँ, बिहनवाँ में देर नइखे भइया,
ललका निसनवाँ से कांपे रजधनिया
ठाकुर बेहाल, केहू करी ना गुलमिया,
हथवा में तीरवा-कमनवाँ, बिहनवाँ में देर नइखे भइया,
कोटवा कनूनिया के मरलस लकवा,
सुरूज के जोति भइल संउसे इलकवा,
भेड़ियन के मानि में मतमवा, बिहनवाँ में देर नइखे भइया
जागि गइल देस के किसनवाँ, बिहनवाँ में देर नइखे भइया।
- पुस्तक : हम कबीर के बानी (चयन : अरविन्द कुमार) (पृष्ठ 46)
- रचनाकार : विजेन्द्र अनिल
- प्रकाशन : संरचना प्रकाशन, आरा
- संस्करण : 2009
Additional information available
Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.
About this sher
rare Unpublished content
This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.