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जबून लागे पानी (बरखा राग)

jabun lage pani (barkha raag)

अशोक द्विवेदी

अशोक द्विवेदी

जबून लागे पानी (बरखा राग)

अशोक द्विवेदी

और अधिकअशोक द्विवेदी

    भींजि जाई गतरे-गतर आज धरती

    चुई ओरियानी

    हमरे सवाँग दूर देश,

    जबून लागे पानी।

    खूबे झकझोर के बरिसि देई बदरा

    तनिको जोगाई नाहीं बहि जाई कजरा

    सँभरी ना हमसे चुवही पलानी,...जबून लागे पानी!

    छछनल धरती के अतमा जुड़ाई

    बूने-बून निखरी सँवर सुघराई

    हमरा प' बिजुरी देखाई मनमानी,...जबून लागे पानी!

    सासुजी के जर बा, ससुर जी के बाई

    खइला महँगी महँग बा दवाई

    जिनिगी अभाव के बा कलपत कहानी,...जबून लागे पानी!

    मछरी के सुख बा कि उमड़ल ताल हो

    हम फिकिरिये में जागीं बेहाल हो

    धुअँवाँ से अँड़सल बा छोटकी चुहानी,...जबून लागे पानी!

    लुगवा बा तार तार फाटल किनारी

    केकरा के दोस देईं केकरा के गारी

    अँतरे अँउसि गइल, सगरो जवानी,...जबून लागे पानी

    स्रोत :
    • पुस्तक : फूटल किरिन हजार (पृष्ठ 40)
    • रचनाकार : अशोक द्विवेदी
    • प्रकाशन : पाती प्रकाशन, बलिया
    • संस्करण : 2003

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