Font by Mehr Nastaliq Web

हम तो से पूछीला जुलुमी सिपहिया

hum to se puchhila julumi sipahiya

विजेन्द्र अनिल

विजेन्द्र अनिल

हम तो से पूछीला जुलुमी सिपहिया

विजेन्द्र अनिल

और अधिकविजेन्द्र अनिल

    हम तो से पूछीला जुलुमी सिपहिया, बतादे हमके ना

    काहे गोलिया चलवले बतादे हमके ना।

    हमरो बलमुआ चोर-बटमारवा

    जांगर ठेठाइ आपन पाले परिवरवा

    केकरा हुकुमवा से खूनवा बहवले, बता दे हमके ना,

    काहे खूनवा बहवले, बतादे हमके ना।

    मरि-मरि खेतवा में अन्न उपजवनीं,

    जिनिगी में बनल रहनीं तबो हम पवनी

    कवना कनूनिया से अगिया लगवले, बतादे हमके ना

    काहे अगिया लगवले, बतादे हमके ना।

    अब बरदास नइखे होत फजीहतिया

    तोहरो अजदिया, हमार भइल रतिया

    अपने मतरिया तनले बनूकिया, बतादे हमके ना

    काहे तनले बनूकिया बतादे हमके ना।

    हम तो से पूछीला जुलुमी सिपहिया, बतादे हमके ना

    काहे गोलिया चलवले, बतादे हमके ना।

    स्रोत :
    • पुस्तक : हम कबीर के बानी (चयन : अरविन्द कुमार) (पृष्ठ 50)
    • रचनाकार : विजेन्द्र अनिल
    • प्रकाशन : संरचना प्रकाशन, आरा
    • संस्करण : 2009

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY

    हिन्दवी उत्सव 2026

    रजिस्टर कीजिए