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हट चूड़ी पहन ले कलइया में

hat chuDi pahan le kaliya mein

रामजियावान दास ‘बावला’

रामजियावान दास ‘बावला’

हट चूड़ी पहन ले कलइया में

रामजियावान दास ‘बावला’

और अधिकरामजियावान दास ‘बावला’

    हट चूड़ी पहन ले कलइया में कलइया में,

    हम छोड़ब बच्चू लड़इया में लड़इया मे॥

    चाहे रंग जाये धरती ललइया में ललइया में।

    छोड़ब बच्चू॥

    सीमा के एहि पार अइबा जइबा। भारत के वीरन के हाथे पिटइबा।

    बहियाँ में केकरा के केतना रे बल बा देखि जाई थोरिकै समइया में।

    छोड़ब बच्चू॥

    करगिल कुल कश्मीर छोड़ भागू। बापू हमरे जगीर छोड़ भागू।

    भाई समझ के जोगवली बहुत हम आगी लगवले मड़इया में॥

    छोड़ब बच्चू॥

    माई बियाइल बा केकरवधउवा। भारत में चढ़ि के बघार जाई तउवा।

    खींच लेब जिभिया की चमड़ी उधेड़ लेब घोंप देब छूरा पलइया में॥

    छोड़ब बच्चू॥

    राणा शिवा और झाँसी की रानी। देशवा हमरे पुरानी कहानी।

    उधम भगत सिंह और चन्द्रशेखर बिसमिल जी चमकैं लोन्हइया में॥

    छोड़ब बच्चू॥

    औकात आपन समुझि रण ठानु। दूसरे के बल पर तम्बू तानू।

    एकै कवर में गड़प होइ जबवे देखब जे आई सहइया में॥

    छोड़ब बच्चू॥

    कसि के कमरिया अखाढ़ैं जवनवाँ। उमड़ल बा भीर जस बरसै सवनवाँ।

    के 'बावला' मति मरले बा तोहरी डाँकैले ताँती तलइया में॥

    छोड़ब बच्चू॥

    स्रोत :
    • पुस्तक : गीत मंजरी
    • संपादक : हरिराम द्विवेदी, जयशंकर प्रसाद द्विवेदी
    • रचनाकार : रामजियावान दास ‘बावला’
    • प्रकाशन : सर्व भाषा ट्रस्ट, नई दिल्ली
    • संस्करण : 2021

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