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एहेन अन्हेर कतौ नै देखल

ehen anher katau nai dekhal

अमित पाठक

अमित पाठक

एहेन अन्हेर कतौ नै देखल

अमित पाठक

और अधिकअमित पाठक

    एहेन अन्हेर कतौ नै देखल

    क्यो डूबि रहलै किओ अछि मदे सूतल

    एहेन अन्हेर...

    कते चिड़ै केर खोंता सेहो उजाड़ गेलै

    से ने बगुला के नजरि एलै

    नजरि ओकर माछमे गड़ल

    चिड़ैक सोह ने ओकरा पर छै की बीतल

    एहेन अन्हेर...

    बेढ़ाएल बाटहु पानिसँ ताकि देब जेम्हर

    कथी लए घूरिकऽ ताकत एम्हर

    उड़ए अकाश खटोला बैसल

    कहाँ धेआन जे की देखलहुँ आर की छूटल

    एहेन अन्हेर...

    हएत उत्किर्णा देखबै हेतै कागत पर

    करोड़ो फूकल जेतै स्वागत पर

    जतऽ जे छी से रहू घेरल

    हम-अहाँ हारि गेलहुँ फेर बगुले जीतल हि

    एहेन अन्हेर...।

    स्रोत :
    • पुस्तक : गीत-गगन (पृष्ठ 105)
    • रचनाकार : अमित पाठक
    • प्रकाशन : नवारम्भ
    • संस्करण : 2024

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