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धधक रहल गाँव

dhadhak rahal gaanv

ब्रजभूषण मिश्र

ब्रजभूषण मिश्र

धधक रहल गाँव

ब्रजभूषण मिश्र

और अधिकब्रजभूषण मिश्र

    तलफत भुँभुरिआ में

    पाक गइल पाँव

    चउगिरदा आग लगल

    धधक रहल गाँव।

    धुआँ-धुआँ सगरो बा

    हवा अँउजाइल,

    सोन्ह महक माटी के

    राख से तोपाइल

    घरे-घर, दलानी में शंका के बास

    साँझ पहर राही डाले कहाँ पड़ाव!

    कहवाँ अब सम्बन्ध

    बस, जाता बाँचल,

    काट-काट छेंटा

    लीं, नात सबे भागल

    सुनहट चउपाल आज लागे उदासल

    बाँटल लोगे बुढ़वा बरगद के छाँव!

    स्रोत :
    • पुस्तक : खरकत जमीन बजरत आसमान (पृष्ठ 105)
    • रचनाकार : ब्रजभूषण मिश्र
    • प्रकाशन : वनांचल प्रकाशन, तेनुघाट (बोकारो)
    • संस्करण : 2015

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