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अब कइसे बचबऽ भइए!

ab kaise bachabऽ bhaiye!

तैयब हुसैन पीड़ित

तैयब हुसैन पीड़ित

अब कइसे बचबऽ भइए!

तैयब हुसैन पीड़ित

और अधिकतैयब हुसैन पीड़ित

    सांस-सांस जहर भरल जा रहल

    अब कइसे बचबऽ भइए!

    पहिला विद्रोह होय या फेर आजादी

    तू ही मारल गइलऽ, तोहरे बरबादी

    ना लड़लन, ना मरलन, तिकरम कइलन

    जे बा गद्दी पर, जेकरा तन पर खादी

    तू लगलऽ फाटल सिए!...

    खेत भइल करखाना, श्रम बाँचल पासे

    केतनो बेचे चहबऽ, तबहूँ उपासे

    करजा पर आज अउर काल्ह तक धराइल

    लउकत ना कुछ बा, जिअबऽ कौन आसे?

    गिरवी बा जब तोहर हिए!...

    ईश्वर ना अइले, ना पैगम्बर अइले

    गुरू सबके घूम-घूम रस्ता भटकइले

    धरम बनल लोग के लड़ावे के धंधा

    पोथी बिन पढ़ले सब ताख पर रखइले

    बउराइल लोग बिन पिए!...

    अब दुनिया में बहत हवा बा

    तनिके कन हर सुख के ढेर-सा दवा बा

    बाकी के हिस्सा में भूख-बदहवाली

    पीठ पर मुसीबत पेट पर तवा बा

    साजिश बा कातिले जिए!

    लड़बऽ बचबऽ भइए!

    स्रोत :
    • पुस्तक : सुर में सब सुर (पृष्ठ 42)
    • रचनाकार : तैयब हुसैन पीड़ित
    • प्रकाशन : शब्द संसार, पटना
    • संस्करण : 2011

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