छिड़ल बा लमहर लड़इया, समइया गंवाव जनि भइया
chhiDal ba lamhar laDaiya, samaiya ganvav jani bhaiya
विजेन्द्र अनिल
Vijendra Anil
छिड़ल बा लमहर लड़इया, समइया गंवाव जनि भइया
chhiDal ba lamhar laDaiya, samaiya ganvav jani bhaiya
Vijendra Anil
विजेन्द्र अनिल
और अधिकविजेन्द्र अनिल
छिड़ल बा लमहर लड़इया, समइया गंवाव जनि भइया
एक ओर धरम-करम संविधनवां
दोसरा तरफ बा सहीद के सपनवां
बिया मंझघरवा में नइया, समइया गंवाव जनि भइया
देखऽ तोहरा संगे लड़े सगरे किसनवां
छात्र-नौजवान लड़े, लड़े बिदवनवां
दुसुमन बनल कसइया, समइया गंवाव जनि भइया
किसिम-किसिम के बिनाइल बा जलवा
लालकिला, देखि लऽ बजावत बा गलवा
वारे के बा सगरे सलइया, समइया गंवाव जनि भइया
तोपवा-बनूकवा, कोरान बाइबिलवा
बेदवा-लबेदवा ह दुसुमन के किलवा
ढाहे के बा किला एही ठंइया, समइया गंवाव जनि भइया
हिटलर मुसोलनी के लास सुगबुगाता
कबुर में सूतल साला जार मुसुकाता
डंहकत जेहल में मइया, समइया गंवाव जनि भइया
छिड़ल बा लमहर लड़इया, समइया गंवाव जनि भइया।
- पुस्तक : हम कबीर के बानी (चयन : अरविन्द कुमार) (पृष्ठ 48)
- रचनाकार : विजेन्द्र अनिल
- प्रकाशन : संरचना प्रकाशन, आरा
- संस्करण : 2009
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