भइया किसनवा हो, सूतल रहब कबले चद्दर तान?
bhaiya kisanva ho, sutal rahab kable chaddar taan?
विजेन्द्र अनिल
Vijendra Anil
भइया किसनवा हो, सूतल रहब कबले चद्दर तान?
bhaiya kisanva ho, sutal rahab kable chaddar taan?
Vijendra Anil
विजेन्द्र अनिल
और अधिकविजेन्द्र अनिल
भइया किसनवा हो, सूतल रहब कबले चद्दर तान?
भइया किसनवा हो...
गद्दी प बइठल बा देखऽ कसइया
चाभत बा हँसि-हँसिके खोआ मलइया;
तोहरा के दुलम पिसान
भइया किसनवा हो...
छंवड़ा के भोरे बधारी पेठवलऽ
छंउड़ी से रात-दिन गोबर पथवलऽ
मउगी अगोरे ले धान
भइया किसनवा हो...
जिनगी भ खटलऽ कइल कमइया
खेवत रहलऽ देसवा के नइया
तबो बा नाक में परान
भइया किसनवा हो...
अंगड़ाई लिहलस पुरनका बगइचा,
लवटावल जाई जुलुमियन के पंइचा,
राति गइल, होई विहान
भइया किसनवा हो...
तोहरे ह गंउआ, तोहरे बधरिया
तोहरे कमीनी प विहंसे सहरिया,
फहरावऽ ललका निसान
भइया किसनवा हो...
- पुस्तक : विजेन्द्र अनिल के गीत (पृष्ठ 21)
- रचनाकार : विजेन्द्र अनिल
- प्रकाशन : संरचना प्रकाशन, आरा
- संस्करण : 1993
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