बदलीं जा देसवा के खाका, बलमु लेइ ललका पताका हो
badlin ja desva ke khaka, balamu lei lalka pataka ho
विजेन्द्र अनिल
Vijendra Anil
बदलीं जा देसवा के खाका, बलमु लेइ ललका पताका हो
badlin ja desva ke khaka, balamu lei lalka pataka ho
Vijendra Anil
विजेन्द्र अनिल
और अधिकविजेन्द्र अनिल
बदलीं जा देसवा के खाका, बलमु लेइ ललका पताका हो।
खुरपी आ हँसुआ से कइनीं इआरी
जिनगी भ सुनलीं मलिकवा के गारी
कबले बने के मुँह ताका, बलमु लेइ ललका पताका हो।
ना चाहीं हमरा के कोठा-अंटारी
ना चाहीं मखमल आ सिलिक के साड़ी
बन करऽ दिल्ली के नाका, बलमु लेइ ललका पताका हो।
राजा आ रानी के उड़े जहजिया
हमनीं के केहू न सुने अरजिया
जाम करऽ सासन के चाका, बलमु लेइ ललका पताका हो।
तू बनिजा सूरज, हम बनि जाइब लाली
तू बनिजा झरना, हम बनबि हरियाली
पंजा प फेंकी जा छाका, बलमु लेइ ललका पताका हो।
बदली जा देसवा के खाका, बलमु लेइ ललका पताका हो।
- पुस्तक : विजेन्द्र अनिल के गीत (पृष्ठ 26)
- रचनाकार : विजेन्द्र अनिल
- प्रकाशन : संरचना प्रकाशन, आरा
- संस्करण : 1993
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