अवध नगरिया से अइली बरियतिया
avadh nagariya se aili bariyatiya
(झूमर)
अवध नगरिया से अइली बरियतिया
सुनु रे सजनी,
जनक नगरिया भइले सोर
सुनु रे सजनी!
चलु चलु सखिया, देखि आईं बरियतिया
सुनु रे सजनी,
पहिरऽ ना लहँगा-पटोर
सुनु रे सजनी!
राजा दशरथ जी के प्राण के आधारवा
सुनु रे सजनी,
कोसिला के अधिका पियार
सुनु रे सजनी!
कहत महेन्दर, भरी देखितीं नयनवाँ
सुनु रे सजनी,
फेरु नाहीं जुटिहें सुतार
सुनु रे सजनी!
- पुस्तक : महेन्द्र मिसिर के चुनिंदा भोजपुरी गीत (पृष्ठ 56)
- संपादक : भगवती प्रसाद द्विवेदी
- रचनाकार : महेन्द्र मिसिर
- प्रकाशन : सर्व भाषा ट्रस्ट, नई दिल्ली
- संस्करण : 2021
Additional information available
Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.
About this sher
rare Unpublished content
This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.