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अँगनवा अन्हारे रहल

anganava anhare rahal

तैयब हुसैन पीड़ित

तैयब हुसैन पीड़ित

अँगनवा अन्हारे रहल

तैयब हुसैन पीड़ित

और अधिकतैयब हुसैन पीड़ित

    दुअरा जरवलीं दियरिया

    अँगनवा अन्हारे रहल!

    लीपी के डेहुरिया, रंगा के केंवाड़ी,

    सोचलीं कि हमहूँ मनाइब देवारी,

    कातिक जोहत नजरिया

    ला अबले कुआरे रहल!

    कास फुलल, कचनरवा फुलाइल,

    पनिया संगे पनडुबिया भुलाइल,

    हमसे मिलन के लहरिया

    लगी-भर किनारे रहल!

    बीतल समइया खिरिकिया से झाँके

    पिहके पपिहरा पिछुतिया में आके

    जाता ना सूतल सेजरिया

    ना घरवा में ठाढ़े रहल!

    कवना साइत मांग करके सेनुरिया,

    बाबा के बिटिया पहिन के चुनरिया,

    तनवा से भइली बहुरिया

    मनवा कुँआरे रहल!

    स्रोत :
    • पुस्तक : सुर में सब सुर (पृष्ठ 24)
    • रचनाकार : तैयब हुसैन पीड़ित
    • प्रकाशन : शब्द संसार, पटना
    • संस्करण : 2011

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