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अमलतास फूल हम

amaltas phool hum

छत्रानन्द सिंह झा

छत्रानन्द सिंह झा

अमलतास फूल हम

छत्रानन्द सिंह झा

और अधिकछत्रानन्द सिंह झा

    नियतिक सीमामे बान्हल

    भकरार जीवन क्षण,

    पाथरक चोट सहल अमलतास फूल हम।

    भावक सब डारि-पात

    टूटि-टाटि छिड़िआयल

    खोंता जे नेहक छल

    से छणमे उड़ियायल,

    समयक डिब्बामे बंद

    आजीवन बंदी हम।

    पाथरक चोट सहल अमलतास फूल हम।

    काल्हि हमर रूप छवि

    शोभा बिलहैत छल

    हमर पीत रूप-छाह

    सुधा-श्री झड़ैत छल

    मनमे उल्लास आब

    स्लथ जीवन हम।

    पाथरक चोट सहल अमलतास फूल हम।

    स्रोत :
    • पुस्तक : एक गुलाबक लेल (पृष्ठ 30)
    • रचनाकार : छत्रानन्द सिंह झा
    • प्रकाशन : नीलकण्ठ प्रकाशन, पटना
    • संस्करण : 1988

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