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अड़हूल फूलक गीत

aDhul phulak geet

गंगेश गुंजन

गंगेश गुंजन

अड़हूल फूलक गीत

गंगेश गुंजन

और अधिकगंगेश गुंजन

    बाड़ी भेल बाड़ीमे अड़हूलक गाछ भेल

    हमरा दरबज्जापर लाल सुरूज ठाढ़ भेल।

    घास बोन हरियर तरकारी केर जंगल

    अन्न फल फलहरी सभ गेल उचंगल

    किछुओ नहि दिन बदलल रहलौं पछुआयले

    खगल केर खगले छी ओहिना रिनायले।

    आब कनी दिन फीरल दिनक जे पसार भेल

    हमरा दरबज्जापर लाल सुरूज ठाढ़ भेल।

    नित्यक पसाही पछवामे हमर गाम

    भेल गेल खक सियाह चुपचाप ठामे-ठाम

    एक चारी धधकलए साँझे-पराते

    बनि कऽ भुतही गाछी ठहकलए हमर गाम

    आब ससरफानी किछु हटलए अन्हरियाक

    आब रक्त टुह-टुह रंग, आर कनी गाढ़ भेल

    हमरा दरबज्जापर लाल सुरूज ठाढ़ भेल।

    सबटा निस्वद्द रहय लोक माल जालक थैर

    भेल रहय बाधक बाट काँट कुशक वन

    चाँछल भरि देहसँ बहैत छलैक पानि पानि

    सोनित की भेले लोक-देहक सेहो ने जानि

    घूरब नहि, धार सुखा रूसि कहि गेल छल

    आब लाल रंग-जल बहैत ग्राम-धार अछि।

    हमर गामक मेघमे लाल सुरूज ठाढ़ भेल।

    बाड़ी भेल बाड़ीमे अड़हूलक गाछ भेल।

    स्रोत :
    • पुस्तक : दुःखक दुपहरिया (पृष्ठ 49)
    • रचनाकार : गंगेश गुंजन
    • प्रकाशन : क्रान्तिपीठ प्रकाशन, पटना
    • संस्करण : 1999

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