आइल बा क्रांति के लहरा हो, चलऽ दिल्ली के ओर
aail ba kranti ke lahra ho, chalऽ dilli ke or
विजेन्द्र अनिल
Vijendra Anil
आइल बा क्रांति के लहरा हो, चलऽ दिल्ली के ओर
aail ba kranti ke lahra ho, chalऽ dilli ke or
Vijendra Anil
विजेन्द्र अनिल
और अधिकविजेन्द्र अनिल
आइल बा क्रांति के लहरा हो, चलऽ दिल्ली के ओर
दिल्ली में राजा, दिल्ली में रानी,
बड़ुए कनूनिया के पहरा हो, चलऽ दिल्ली के ओर
दिल्ली में मस्ती, दिल्ली में हस्ती
संसद में बोले पपिहरा हो, चलऽ दिल्ली के ओर
हमनीं के बैला, हमनीं के खेती
दिल्ली मनावे दसहरा हो, चलऽ दिल्ली के ओर
हमनीं के लड़नीं, हमनीं के मरनीं
रानी के माथा प सेहरा हो, चलऽ दिल्ली के ओर
हमनीं के बोली, रानी के गोली
नेताजी भइलन बेबहरा हो, चलऽ दिल्ली के ओर
हमनीं के धरती, हमनीं के दुनिया
कबले पढ़े के ककहरा हो, चलऽ दिल्ली के ओर
लाठी उठावऽ झंडा उड़ावऽ
टूटी बनूकिया के पहरा हो, चलऽ दिल्ली के ओर
दिल्ली के बान्हऽ दिल्ली के छानऽ
लाल किला नइखे लमहरा हो, चलऽ दिल्ली के ओर
गंगा के किरिया, जमुना के किरिया
जुलुमिन के तूरऽ सिकहरा हो, चलऽ दिल्ली के ओर
आइल बा क्रांति के लहरा हो, चलऽ दिल्ली के ओर।
- पुस्तक : हम कबीर के बानी (चयन : अरविन्द कुमार) (पृष्ठ 55)
- रचनाकार : विजेन्द्र अनिल
- प्रकाशन : संरचना प्रकाशन, आरा
- संस्करण : 2009
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