आई चढ़िके जहिया सीमा पर मुदइया बिरना
aai chaDhike jahiya sima par mudaiya birna
रामजियावान दास ‘बावला’
Ramjiyaavan Das ‘Bawla’
आई चढ़िके जहिया सीमा पर मुदइया बिरना
aai chaDhike jahiya sima par mudaiya birna
Ramjiyaavan Das ‘Bawla’
रामजियावान दास ‘बावला’
और अधिकरामजियावान दास ‘बावला’
आई चढ़िके जहिया सीमा पर मुदइया बिरना।
तहिया लेबै तोहसे राखी क बन्हइया बिरना॥
देश जाति जन्म भूमि शान मान के बदे।
आई देवी रण वाली रक्त दान के बदे।
जहिया मारी केहू गइया के कसइया बिरना।
तहिया लेबे तोहसे राखी क बन्हइया बिरना॥
मोरे भाभी के सेन्हुरवा अमर करिहा।
आई काल बिकराल त समर करिहा।
जहिया देश में देखाई दुख दइया बिरना।
तहिया लेबे तोहसे राखी क बन्हइया बिरना॥
केहू अँखिया देखावै काश्मीर के बदे।
केहू आवैला त बापू के जागीर के बदे।
जहिया छीनी केहू सोने क चिरइया बिरना।
तहिया लेबै तोहसे राखी क बन्हइया बिरना॥
हाथ माथ क शहीद इतिहास रखलैं।
कबौं रोटिया बनावै बदे घास रखलैं।
जहिया बावला क बाझी कतौं नइया बिरना।
तहिया लेबै तोहसे राखी क बन्हइया बिरना॥
- पुस्तक : गीतलोक (पृष्ठ 112)
- रचनाकार : रामजियावान दास ‘बावला’
- प्रकाशन : सेवक प्रकाशन, वाराणसी
- संस्करण : 1997
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