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गढ़ सतवारी

अनुवाद : पद्मा सचदेव

अज्ञात

अज्ञात

गढ़ सतवारी

अज्ञात

और अधिकअज्ञात

    राजा तो जम्मू में रहता

    पलटन गढ़, सतवारी

    दूर देश से लिख कर आया

    जंग शुरू हुई भारी

    लंदन गढ़ से चिट्ठी आई

    पलटन करे तैयारी

    मंडी में बैठा राजा रोता

    महल में रोए रानी

    राजा मैं अकेली रह गई

    दे जा कोई निशानी

    कौन है तेरा जाया राजा

    कौन पिलाए पानी

    दक्षिण से इक हवा चली

    तूफ़ान, बरसात अँधेरी

    राजा गया मुहिम पर लोगों

    मौत ने घेरा डाला

    महल दुमहले बसे हुए

    आज हुए सब खंडहर

    स्रोत :
    • पुस्तक : डोगरी लोकगीत संसार (पृष्ठ 19)
    • रचनाकार : हिन्दवी के लिए अनुवादक द्वारा चयनित।
    • प्रकाशन : साहित्य अकादेमी
    • संस्करण : 1999

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