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सोना बया न नीपजै

sona baya na nipajai

जमाल

अन्य

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जमाल

सोना बया न नीपजै

जमाल

और अधिकजमाल

    सोना बया नीपजै, मोती लगै डाल॥

    रूप उधारा नां मिलै, भूलै फिरौ जमाल॥

    सोना बोने से उपजता नहीं, मोती किसी डाल में नहीं फलता, रूप (लावण्य) कहीं से उधार नहीं मिल सकता; इन्हें प्राप्त करने के लिए भ्रमवश भटकना नहीं चाहिए।

    स्रोत :
    • पुस्तक : जमाल दोहावली (पृष्ठ 22)
    • संपादक : महावीर सिंह गहलोत
    • रचनाकार : जमाल
    • प्रकाशन : पुस्तक भवन काशी

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