Munshi Premchand's Photo'

प्रेमचंद

1880 - 1936 | लमही, उत्तर प्रदेश

हिंदी कहानी के पितामह और उपन्यास-सम्राट के रूप में समादृत। हिंदी साहित्य में आदर्शोन्मुख-यथार्थवाद के प्रणेता।

हिंदी कहानी के पितामह और उपन्यास-सम्राट के रूप में समादृत। हिंदी साहित्य में आदर्शोन्मुख-यथार्थवाद के प्रणेता।

प्रेमचंद की संपूर्ण रचनाएँ

कहानी 12

आलोचनात्मक लेखन 3

 

उद्धरण 50

परिहास में औरत अजेय होती है, ख़ासकर जब वह बूढ़ी हो।

  • शेयर

स्त्री और पुरुष में मैं वही प्रेम चाहता हूँ, जो दो स्वाधीन व्यक्तियों में होता है। वह प्रेम नहीं, जिसका आधार पराधीनता है।

  • शेयर

पुरुष में थोड़ी-सी पशुता होती है, जिसे वह इरादा करके भी हटा नहीं सकता। वही पशुता उसे पुरुष बनाती है। विकास के क्रम में वह स्त्री से पीछे है। जिस दिन वह पूर्ण विकास को पहुँचेगा, वह भी स्त्री हो जाएगा।

  • शेयर

धर्म का मुख्य स्तंभ भय है।

  • शेयर

अतीत चाहे दु:खद ही क्यों हो, उसकी स्मृतियाँ मधुर होती हैं।

  • शेयर

पुस्तकें 4

गोपालकृष्ण गोखले

 

1989

मानसरोवर

भाग-003

 

स्मृति का पुजारी

 

1990

टॉल्स्टॉय की कहानियाँ

 

2000

 

"उत्तर प्रदेश" के और लेखक

  • गिरिराज किशोर गिरिराज किशोर
  • अखिलेश अखिलेश