हजारीप्रसाद द्विवेदी का आलोचनात्मक लेखन
उपन्यास और कहानी
उपन्यास और कहानियाँ हमारे साहित्य में नई चीज़ हैं। पुराने साहित्य में कथा, आख्यायिका आदि के रूप में इस जाति का साहित्य मिलता है पर उनमें और आधुनिक कथाओं-उपन्यास और कहानियों में मौलिक भेद है। मौक़ा पाकर हम इस भेद को समझने का प्रयत्न करेंगे। अभी तो हम
भक्तिकाल (पूर्वमध्यकाल)
भक्ति-साहित्य वास्तविक हिंदी साहित्य का आरंभ भक्ति-साहित्य का आरंभ : चौदहवीं शताब्दी तक हिंदीभाषी प्रदेशों में देशी भाषा का साहित्य कैसा था, इस बात की धारणा बहुत अस्पष्ट रूप में ही होती है। हम केवल इतना जानते हैं कि पूर्वी प्रदेशों में सहजयानी
नीतिकाव्य
नीतिकाव्य : शृंगारी रचनाओं के समान ही इस काल में नीति-विषयक रचनाओं की अधिकता है। नीति-संबधी रचनाओं की परंपरा भी काफ़ी पुरानी है। भर्तृहरि ने एक ही साथ शृंगार, नीति और वैराग्य के तीन शतक लिखे थे। संस्कृत के सुभाषितों में अन्योक्तिच्छल से बहुत अधिक