अशोक मिश्र की कहानियाँ
दीनानाथ की चक्की
दीनानाथ आज अन्य दिनों की तुलना में काफ़ी उत्साहित दिख रहा था। उसका कारण भी साफ़ था, सवेरे-सवेरे अख़बार में उसे एक ख़बर पढ़ने को मिली थी कि सरकार हाईस्कूल, इंटर तक पढ़े शिक्षित बेरोज़गारों को एक लाख़ रुपए तक का क़र्ज़ देगी, जिसमें पच्चीस प्रतिशत की
कबाड़वाले की मौत
(नवें दशक के किसी एक दिन) वह कबाड़वाला था। साइकिल में लटकती बोरी, कांटे वाली हाथ से पकड़ने वाली तराज़ू और किलो—दो किलो के बटखरे देखकर ही पता चल जाता था कि वह कबाड़ी है। क़मीज़—पायजामा का बहुत सादा-सा पहनावा और पैरों में हवाई चप्पल और मुरझाए चेहरे पर