Font by Mehr Nastaliq Web

अनहद पर कविताएँ

अनहद का अर्थ अनाहत या

सीमातीत है। इसका अर्थ समाधि की स्थिति में सुनाई पड़ने वाला नाद भी है। कबीर, गुरु नानक, मलूकदास आदि मध्यकालीन भक्त-कवियों द्वारा इस शब्द के प्रयोग ने इसे विशेष लोकप्रिय बनाया है।

असीम

संतोष कुमार चतुर्वेदी

संबंधित विषय

हिन्दवी उत्सव 2026

रजिस्टर कीजिए