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यह विधि सचु सों रैनु बिहानी
यह विधि सचु सों रैनु बिहानी।बहुत दिनन के बिछुरे प्रीतम, मिले सकल सुखदानी॥
गोस्वामी हरिराय
दीनानाथ दयता मो पै कीजिए
दीनानाथ दयता मो पै कीजिए।मोसो अधम उधारि प्रभु जग मांझि यह लख लीजिए॥
बख्तराम साह
इण जिवड़े रै कारणे
इण जिवड़े रै कारणे, हरि हर नांव चितारे।ओ धन तो है ढळती छाया, ज्यूं धूवैं री धारे।
जसनाथ
चंदन की खोर कीये
प्यारी के पिया को नेम पिय के प्यारी सो प्रेम अरस परसरीझ रीझावे जेठ की दूपेरी में।
परमानंद दास
इंद्र हू की असवारी
बादरन की फ़ौजें छाईं बूँदन की तीरा कारी॥दामिनी की रंजक, तामैं ओले-गोले तोप छुटत,
बैजू
झूलै कुँवरि गोपराइन की
झूलै कुँवरि गोपराइन की। मधि राधा सुंदरि-सुकुमारि॥प्रथमहि रितु पावस आरम्भ। श्रीवृषभानु मँगाये खंभ॥
गदाधर भट्ट
नाथ अनाथन की सब जानै
की बहु खोट जानि जिय मेरी की कछु स्वारथ हित अरगानै॥दीन बंधु मनसा के दाता गुन औगुन कैधो मन आनै।
जुगलप्रिया
देशोद्धार की तान
अल्ला करें ब्याह विधवन का गॉडहु के मन भाई रे।निराकार ने सात चार की चोखी चाल चलाई रे॥
बालमुकुंद गुप्त
छबि आवन मोहनलाल की
आप मोल बिन मोलनि डोलनि बोलनि मदन गोपाल की।यह सरूप निरखै सोइ जानै यहि रहीम के हाल की॥
रहीम
ब्रज की नारी डोल झुलावैं
ब्रज की नारी डोल झुलावैं।सुख निरखत मन मैं सचु पावें मधुर-मधुर कल गावैं॥
नंददास
ख़्वाजादास के पद
जतन से ओढ़ी धवल कामरी कचड़ा बीच लबार गएजनम करम की नासी सब गति करने को व्योपार गए
मृत्युंजय
मंगल आरति प्रिया प्रीतम की
जुगलप्रिया
माल गल तुलसी दल की
माल गल तुलसी दल की नंदलाल लिए मुरली विहरें वन।प्रान पिया के हिया कौ हर हँसि होति सुखी ललितादि सखीगन॥