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ऐसा कहूँ नहीं जी परबंदा
ऐसा कहूँ नहीं जी परबंदा, छोड़े सब ही धंदा।कितवे सेंवी मुलुक गवायां, कुफ़र में डूबा अंधा।
मध्व मुनीश्वर
मन श्रीराधाकृष्ण-धन ढूँड़ौ
मन श्रीराधाकृष्ण-धन ढूँड़ौ।नहिं तौ परिहौ भवसागर में मिलत न पंथ भेद अति ऊँड़ौं।