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कोकिल अब क्यों मौन गही
कोकिल अब क्यों मौन गही?बहु विधि फूल विपिन में फूले मंद समीर बही॥
बालमुकुंद गुप्त
राम मिलन क्यों पइये
राम मिलन क्यों पइये, मोहिं राखा ठगवन घेरि हो।क्रोध तो काला नाग है, काम तो मरघट काल।
मलूकदास
तुम सों क्यों कहौं ब्रजनाथ
तुम सों क्यों कहौं ब्रजनाथ।मोहू को अति गिरा गद्गद देखि विरह अनाथ॥
चतुर्भुजदास
क्यों हम जीवैं दास गुसाईं
क्यों हम जीवैं दास गुसाईं। जे तुम छाडौ समरथ साईं॥जे तुम जन को मनहिं बिसारा। तौ दूसर कौण सँभालनहारा।
दादू दयाल
राम नाम क्यों लीजै मन राजा
राम नाम क्यों लीजै मन राजा।काहु भाँति मेरे हाथ न आवै, महा बिकट दल साजा॥
मलूकदास
क्यों जी, कुल-कानि तजैई बनैगी
क्यों जी, कुल-कानि तजैई बनैगी!कुल-कलंक ब्रजचंद स्याम कों, अब का बीर भजैई बनैगी॥
ललितमाधुरी
गोविंद के गुण क्यों नहिं गावो
गोविंद के गुण क्यों नहिं गावो।ममता नींद कहा मन सूतो जागि हरिसूं चितलावो॥
सहजोबाई
साँवरे, क्यों मोसों रिसि मानी
साँवरे, क्यों मोसों रिसि मानी।तेरे काज घर बार त्यागिकैं गलियन फिरति दिवानी॥
नारायण स्वामी
नाहि करब बर हर निरमोहिया
नाहि करब बर हर निरमोहिया।बित्ता भरि तन बसन न तिन्हका बघछल काँख तर रहिया॥
विद्यापति
हर जनि बिसरब मो ममिता
हर जनि बिसरब मो ममिता, हम नर अधम परम पतिता।तुम सन अधम उधार न दोसर, हम सन जग नहिं पतिता॥
विद्यापति
हरि के नाम कौं आलस क्यों करत हैं रे
हरि के नाम कौं आलस क्यों करत हैं रे, काल फिरत सर साँधे।हीरा बहुत जवाहर संचे, कहा भयो हस्ती दर बाँधे॥