आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "ujalon ke phool ebooks"
Doha के संबंधित परिणाम "ujalon ke phool ebooks"
सब कहँ फूल बसत सुख
सब कहँ फूल बसत सुख, अगिन लूक सम सोहि।सकल सुजोग कुयोग भव, रामलला बिन तोहि॥
रामचरणदास
संग पाय कै बुधन के
संग पाय कै बुधन के, छिद्र निहारैं नीच।बिलहिं विलोकै भुजंग ज्यों, रंगभवन के बीच॥
दीनदयाल गिरि
सब साधन को एक फल
सब साधन को एक फल, जेहिं जान्यो सो जान।ज्यों त्यों मन मंदिर बसहिं, राम धरें धनु बान॥
तुलसीदास
ब्रजदेवी के प्रेम की
ब्रजदेवी के प्रेम की, बँधी धुजा अति दूरि।ब्रह्मादिक बांछत रहैं, तिनके पद की धूरि॥
ध्रुवदास
शुतर गिरयो भहराय के
शुतर गिरयो भहराय के, जब भा पहुँच्यो काल।अल्प मृत्यु कूँ देखि के, जोगी भयो जमाल॥
जमाल
गर्व भुलाने देह के
गर्व भुलाने देह के, रचि-रचि बाँधे पाग।सो देही नित देखि के, चोंच सँवारे काग॥
मलूकदास
प्रिय-परिकर के सुघरजन
प्रिय-परिकर के सुघरजन, बिरही-प्रेम-निकेत।देखि कबै लपटायहों, उनतें हिय करिहेत॥
नागरीदास
गज-मुक्ता-फल! करु न मद
गज-मुक्ता-फल! करु न मद, निज अमोलता जान।तुव कारन पितु-द्विरद के, गये बिपिन बिच प्रान॥
मोहन
पद्मनाभ के नाभि की
पद्मनाभ के नाभि की, सुखमा सुठि सरसाय।निरखि भानुजा धार को, भ्रमि-भ्रमि भंवर भुलाय॥