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ओ गोरी-मुह-निज्जिअउ
ओ गोरी-मुह-निज्जिअउ बद्दलि लुक्कु मियंकु।अन्नु वि जो परिहविय-तणु सो किवँ भवइँ निसंकु॥
हेमचंद्र
जिह घटि सिमरन राम को
जिह घटि सिमरन राम को, सो नर मुक्ता जान।तिहि नर हरि अंतर नहीं, नानक साची मान॥
गुरु तेग़ बहादुर
जिह सिमरत गत पाइये
जिह सिमरत गत पाइये, तिहि भज रे तैं मीत।कह नानक सुन रे मना, अउधि घटति है नीत॥
गुरु तेग़ बहादुर
तनु धनु जिह तोकउ
तनु धनु जिह तोकउ दिओ, तासिउ नेहु न कीन।कहु नानक नर बावरे, अब किउ डोलत दीन॥
गुरु तेग़ बहादुर
असतति निंदिआ नाहिं जिह
असतति निंदिआ नाहिं जिह, कंचन लोह समानि।कह नानक सुन रे मना, मुक्त ताहि तैं जानि॥
गुरु तेग़ बहादुर
सुख-दुख जिह परसै नहीं
सुख-दुख जिह परसै नहीं, लोभ मोह अभिमान।कहु नानक सुन रे मना, सो मूरत भगवान॥
गुरु तेग़ बहादुर
देवा रसना गहलैं चालि
देवा रसना गहलैं चालि कै, हृदय सूरति नाम।राह बतावै और कूँ, आगे किया मुकाम॥
देवादास
रीझ लैन पिय पैं चली
रीझ लैन पिय पैं चली, लिय सषिगन कौं गैल।चहूँ ओर मुखचंद की, रही चाँदनी फैल॥
दौलत कवि
झपकि रही, धीरें चलौ
झपकि रही, धीरें चलौ, करौ दूरि तें प्यार।पीर-दब्यौ दरकै न उर, चुंबन ही के भार॥
दुलारेलाल भार्गव
चलि रुकि तिय पिय को लखति
चलि रुकि तिय पिय को लखति, उरझी मनमथ-लाज।करनी मनु लंगर-बँधी, निरखि रही गजराज॥
मोहन
सुन्दर देह हलै चलै
सुन्दर देह हलै चलै, जब लगि चेतनि लाल।चेतनि कियौ प्रयान जब, रूसि रहै ततकाल॥
सुंदरदास
चली बाल पिय पास अति
चली बाल पिय पास अति, भरी प्रेम रस-भार।कह्यौ अली कित, लाज बस, लगी सँचारन हार॥