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सुन्दर कछू न कीजिये
सुन्दर कछू न कीजिये, क्रिया कर्म भ्रम आन।करने कौ हरि भक्ति है, समझन कौं है ज्ञान॥
सुंदरदास
सुंदर सौदा कीजिये
सुंदर सौदा कीजिये, भली वस्तु कछु खाटि।नाना बिधि काटांगरा, उस बनिया की हाटि॥
सुंदरदास
लोभ न कबहूं कीजिये
लोभ न कबहूं कीजिये, या में विपति अपार।लोभी को विश्वास नहिं, करे कोऊ संसार॥
गिरिधारन
दुर्जन संग न कीजिये
दुर्जन संग न कीजिये, सहिये दुःख अनेक।सुन्दर सब संसार मैं, दुष्ट समान न एक॥
सुंदरदास
मथि करि दीपक कीजिये
मथि करि दीपक कीजिये, सब घट भया प्रकास।दादू दीया हाथ करि, गया निरंजन पास॥
दादू दयाल
पीपा पाप न कीजिये
पीपा पाप न कीजिये, तौ पुनि कीया सौ बार।जै कुछ लोभ न लेण का, तौ दीन्ही बार हजारा॥
संत पीपा
चिंता ताकी कीजिए
चिंता ताकी कीजिए, जो अनहोनी होइ।इह मारगु संसार को, नानक थिरु नहिं कोइ॥
गुरु तेग़ बहादुर
ताकौं ढील न कीजिए
ताकौं ढील न कीजिए ह्वै जु धरम को काजु।को जानैं कल ह्वै कहा करिबो सो करि आजु॥
जान कवि
देखो करनी कमल की
देखो करनी कमल की, कीनों जल सों हेत।प्राण तज्यो प्रेम न तज्यो, सूख्यो सरहिं समेत॥
सूरदास
नित प्रति वंदन कीजिये
नित प्रति वंदन कीजिये, गुरु कूँ सीस नवाय।दया सुखी कर देत है, हरि स्वरूप दर साय॥
दयाबाई
जमला प्रीत न कीजिये
जमला प्रीत न कीजिये, काहू सों चित लाय।अलप मिलण बिछुड़न बहुत, तड़फ तड़फ जिय जाय॥