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कहै मीता हरिदास की
कहै मीता हरिदास की, सरनै पहुँचै कोय।ब्रह्मा तिन्हे न पावह, पोथिन पढ़ै का होय॥
मीतादास
‘व्यास’ न कथनी और की
‘व्यास’ न कथनी और की, मेरे मन धिक्कार।रसिकन की गारी भली, यह मेरौ सिंगार॥
हरीराम व्यास
पिया मेरे और मैं पिया की
पिया मेरे और मैं पिया की, कुछ भेद न जानो कोई।जो कुछ होय सो मौज से होई, पिया समरथ करें सोई॥
संत सालिगराम
राम नाम कौं छाडि कै
राम नाम कौं छाडि कै, और भजै ते मूढ।सुन्दर दुख पावै सदा, जन्म-जन्म वै हूढ॥
सुंदरदास
और सकल अघ-मुचन कौ
और सकल अघ-मुचन कौ, नाम उपायहिं नीक।भक्त-द्रोह कौ जतन नहिं, होत बज्र की लीक॥
ध्रुवदास
तीरथ व्रत और दान करि
तीरथ व्रत और दान करि, मन में धरे गुमान।नानक निषफल जात हैं, जिउ कूँचर असनान॥
गुरु तेग़ बहादुर
कुंडल जिय-रक्षा करन
कुंडल जिय-रक्षा करन, कवच करन जय वार।करन दान आहव करन, करन-करन बलिहार॥
गणेशपुरी पद्मेश
तुका और मिठाई क्या करूँ
तुका और मिठाई क्या करूँ, पाले विकार पिंड।राम कहावे सो भली रूखी, माखन खीर खांड॥
संत तुकाराम
करें भक्ति भगवंत की
करें भक्ति भगवंत की, कबहुं करै नहिं चूक।हरि रस में राचो रहै, साँची भक्ति मलूक॥
मलूकदास
ब्रजदेवी के प्रेम की
ब्रजदेवी के प्रेम की, बँधी धुजा अति दूरि।ब्रह्मादिक बांछत रहैं, तिनके पद की धूरि॥
ध्रुवदास
सुन्दर चितवै और कछु
सुन्दर चितवै और कछु, काल सु चितवै और।तूं कहुं जाने की करै, वहु मारै इहिं ठौर॥
सुंदरदास
हिन्दू में क्या और है
हिंदू में क्या और है, मुसलमान में और।साहिब सब का एक है, ब्याप रहा सब ठौर॥