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तरनापो इउँही गइओ
तरनापो इउँही गइओ, लिइओ जरा तनु जीति।कहु नानक भजु हरि मना, अउधि जाति है बीति॥
गुरु तेग़ बहादुर
चिंता ताकी कीजिए
चिंता ताकी कीजिए, जो अनहोनी होइ।इह मारगु संसार को, नानक थिरु नहिं कोइ॥
गुरु तेग़ बहादुर
माया कारनि ध्यावहीं
माया कारनि ध्यावहीं, मूरख लोग अजान।कहु नानक बिनु हरि भजन, बिर्था जन्म सिरान॥
गुरु तेग़ बहादुर
नाम रहिओ साधू रहिओ
नाम रहिओ साधू रहिओ, रहिओ गुरु गोविंद।कहू नानक इह जगत में, किन जपिओ गुरु मंद॥
गुरु तेग़ बहादुर
जो उपजिओ सो विनसिहै
जो उपजिओ सो विनसिहै, परो आजु के काल।नानक हरि गुन गाइ ले, छाड़ि सकल जंजाल॥
गुरु तेग़ बहादुर
जगत भिखारी फिरत है
जगत भिखारी फिरत है, सब को दाता राम।कहु नानक मन सिमरु, तिह पूरन होवहिं काम॥
गुरु तेग़ बहादुर
जन्म-जन्म भरमत फिरिओ
जन्म-जन्म भरमत फिरिओ, मिटिओ न जम को त्रासु।कहु नानक हरि भजु मना! निर्भय पावहि बासु॥
गुरु तेग़ बहादुर
गुरु गोविंद गाइओ नहीं
गुरु गोविंद गाइओ नहीं, जनमु अकारथ कीन।कहु नानक हरि भजु मना, जिहि विधि जल कौ मीन॥
गुरु तेग़ बहादुर
जिउ स्वप्ना और पेखना
जिउ स्वप्ना और पेखना, ऐसे जग को जान।इन मैं कछु साचो नहीं, नानक बिन भगवान॥
गुरु तेग़ बहादुर
प्रानी राम न चेतई
प्रानी राम न चेतई, मद माया के अंध।कहु नानक हरि भजन बिनु, परत ताहि जम फंद॥
गुरु तेग़ बहादुर
जैसे जल ते बुदबुदा
जैसे जल ते बुदबुदा, उपजै बिनसै नीत।जग रचना तैसे रची, कहु नानक सुन मीत॥
गुरु तेग़ बहादुर
जो प्रानी ममता तजै
जो प्रानी ममता तजै, लोभ मोह अहँकार।कह नानक आपन तरै, औरन लेत उद्धार॥
गुरु तेग़ बहादुर
धन दारा संपत्ति सकल
धन दारा संपत्ति सकल, जिनि अपनी करि मानि।इन में कुछ संगी नहीं, नानक साची जानि॥
गुरु तेग़ बहादुर
विखिअन सिउ काहे रचिओ
विखिअन सिउ काहे रचिओ, निमिख न होहि उदास।कहु नानक भजु हरि मना, परै न जम की फास॥
गुरु तेग़ बहादुर
बाल ज्वानि और बृद्धपन
बाल ज्वानि और बृद्धपन, तीनि अवस्था जान।कहु नानक हरि भजन बिनु, बिरथा सब ही मान॥
गुरु तेग़ बहादुर
राम गइओ रावनु गइओ
राम गइओ रावनु गइओ, जा कउ बह परिवार।कह नानक थिर कछु नहीं, सुपने जिउँ संसार॥
गुरु तेग़ बहादुर
बल होया बंधन छुटे
बल होया बंधन छुटे, सब किछु होत उपाय।सब कुछ तुमरे हाथ में, तुम ही होत सहाय॥
गुरु तेग़ बहादुर
सिरु कँपिओ पगु डगमगै
सिरु कँपिओ पगु डगमगै, नैन ज्योति ते हीन।कहु नानक इह विधि भई, तऊ न हरि रस लीन॥
गुरु तेग़ बहादुर
पतित उधारन भै हरन
पतित उधारन भै हरन, हरि अनाथ के नाथ।कहु नानक तिह जानिहो, सदा बसतु तुम साथ॥