सोरठा
अर्द्धसम मात्रिक छंद। विषम चरणों में तुक और ग्यारह-ग्यारह मात्राएँ और सम चरणों में तेरह-तेरह मात्राएँ। दोहे के चरण उलट देने से सोरठा बन जाता है।
रीतिकाल के नीतिकवि। हिंदी के पहले संबोधन काव्य के रचयिता। 'राजिया' को संबोधित सोरठों के लिए समादृत।
सिक्खों के नौवें गुरु। निर्भय आचरण, धार्मिक अडिगता और नैतिक उदारता का उच्चतम उदाहरण। मानवीय धर्म एवं वैचारिक स्वतंत्रता के लिए महान शहादत देने वाले क्रांतिकारी संत।
हिंदूवादी कवि। महाराणा प्रताप की शौर्यगाथा ‘विरुद छहतरी’ के लिए स्मरणीय।
हिंदी, उर्दू (देवनागरी), गुजराती, मराठी, ब्रजभाषा के प्रसिद्ध गीतकार एवं ग़ज़लकार।
बीकानेर नरेश के भाई और अकबर के दरबारी कवि। भक्ति साहित्य के लिए प्रसिद्ध। 'डिंगल' भाषा के प्रधान कवियों में से एक।
'राधास्वामी सत्संग' के प्रवर्तक। सरस और हृदयग्राह्य वाणियों के लिए प्रसिद्ध।