प्रभु जू सरन तिहारी आयो

चरनदास

प्रभु जू सरन तिहारी आयो

चरनदास

और अधिकचरनदास

    प्रभु जू सरन तिहारी आयो।

    जो कोइ सरन तिहारी नाहीं भरम भरम दुख पायो॥

    औरन के मन देवी देवा मेरे मन तुहि भायो।

    जब सों सुरति सम्हारी जग में और सीस नवायो॥

    तरपति सुरपति आस तुम्हारी यह सुनि के मैं धायो।

    तीरथ बरत सकल फल त्याग्यौ चरन कमल चित लायो॥

    नारद मुनि अरु सिव ब्रह्मादिक तेरो ध्यान लगायो।

    आदि अनादि जुगादि तेरो जस बेद पुरानन गायो॥

    अब क्यों वाँह गहो हरि मेरी तुम काहे बिसरायो।

    चरनदास कहैं करता तूही गुरु सुकदेव बतायो॥

    स्रोत :
    • पुस्तक : हिंदी के जनपद संत (पृष्ठ 173)
    • रचनाकार : चरनदास
    • प्रकाशन : मोेतीलाल बनारसी, दिल्ली
    • संस्करण : 1963

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