रासो काव्य

आदिकाल में रचित वीरगाथा काव्य। भाषा डिंगल और विषयवस्तु युद्ध और शृंगार। जैन साहित्य के अंतर्गत आने वाले 'रासो काव्य' की भावभूमि में 'जैनधर्म' का प्रचार-प्रसार प्रमुख रहा।

समय : 13वीं सदी। जैन कवि। जैन धर्म में जीव दया के महत्त्व को स्थापित करने के लिए करुण रस से परिपूर्ण खंडकाव्य-लेखन।

सूफ़ी संत। शाह निज़ामुद्दीन चिश्ती की शिष्य परंपरा में 'हाजी बाबा' के शिष्य। भाषा में अवधी के साथ अरबी-फ़ारसी की शब्दावली का प्रयोग।

हिंदी के प्रथम महाकवि। वीरगाथा काल से संबद्ध। ‘पृथ्वीराज रासो’ कीर्ति का आधार-ग्रंथ।

1168 -1192

आदिकाल की जैन काव्य परंपरा के उल्लेखनीय कवि।

आदिकालीन काव्य धारा के जैन कवि।

अजमेर के राजा विग्रहराज चतुर्थ के राजकवि। वीरगीत के रूप में सबसे पहली कृति 'बीसलदेव रासो' के रचयिता।

सूफ़ी काव्य परंपरा के कवि। संयोग और वियोग की विविध दशाओं के वर्णन में सिद्धहस्त। 'रसरतन' ग्रंथ कीर्ति का आधार।

आदिकालीन जैन काव्य-धारा के कवि।

समय : 13वीं सदी। जैन कवि। गणपतिचंद्र गुप्त के अनुसार हिंदी के प्रथम कवि। अनेक कृतियों से रास-काव्य-परंपरा को समृद्ध किया।

समय : 13वीं सदी। जैन कवि। जैन धर्म-प्रचार के साथ-साथ काव्य में नीति निरूपण के लिए स्मरणीय।