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वात्स्यायन के उद्धरण

यदि नायिका स्वयं नायक से विवाह करने में असमर्थ हो, तो नायक उसकी अंतरंग कुलीन स्त्री अथवा पहिले से नायिका के माता-पिता से संबंध रखने वाली पूर्व परिचित किसी लड़की को मध्यस्थ बनाकर, उसे धन आदि देकर अनुकूल करके उसके द्वारा किसी अन्य कार्य के बहाने से किसी उपयुक्त स्थान पर उसे (नायिका) को लाए। फिर किसी श्रोत्रिय ब्राह्मण के घर से अग्नि को लाकर, पहिले की तरह अग्नि को साक्षी बनाकर विवाह कर ले।